कुंडली पढ़ते समय सबसे पहला सवाल यही आता है: कौन सा ग्रह कहाँ बैठा है। इसके लिए नवग्रह को जानना ज़रूरी है।
नौ ग्रह कौन से हैं
सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, यही नौ ग्रह वैदिक ज्योतिष में गिने जाते हैं। राहु और केतु खगोलीय ग्रह नहीं, बल्कि चंद्र कक्षा के दो बिंदु हैं, फिर भी इन्हें ग्रह के समान महत्व दिया गया है।
हर ग्रह का अपना क्षेत्र
सूर्य आत्मविश्वास और अधिकार से, चंद्रमा मन और भावनाओं से, मंगल साहस और ऊर्जा से, बुध बुद्धि और संवाद से, गुरु ज्ञान और विस्तार से, शुक्र प्रेम और सौंदर्य से, शनि अनुशासन और कर्मफल से जुड़ा माना जाता है।
कुंडली में स्थिति मायने रखती है
कोई ग्रह किस राशि, लग्न से गिने गए किस भाव और किस नक्षत्र में बैठा है, यही तय करता है कि उसका प्रभाव कैसा रहेगा।
राहु-केतु क्यों खास हैं
राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है क्योंकि इनका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं, ये चंद्रमा की कक्षा और पृथ्वी की कक्षा के दो कटाव बिंदु हैं, जिन्हें उत्तर और दक्षिण नोड कहा जाता है। यही कारण है कि ग्रहण भी राहु-केतु के आसपास ही होते हैं, जब सूर्य, चंद्रमा और ये बिंदु एक सीध में आ जाते हैं। ज्योतिष में इन्हें इच्छा (राहु) और मोक्ष (केतु) से जोड़ा जाता है।
अपनी कुंडली में नवग्रह देखें
जन्म कुंडली टूल पर अपनी पूरी कुंडली में सभी नौ ग्रहों की स्थिति मुफ़्त में देखें।