दिन के सभी मुहूर्तों में, चौघड़िया और राहु काल सहित, अभिजित मुहूर्त को सबसे शुभ और सबसे भरोसेमंद माना जाता है।
अभिजित मुहूर्त कब आता है
यह दिन के ठीक मध्य के आसपास, यानी स्थानीय दोपहर के आस-पास आता है, और लगभग 48 मिनट लंबा होता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के आठवें मुहूर्त (दिन को 15 मुहूर्तों में बाँटकर) के रूप में इसकी गणना होती है।
इतना शुभ क्यों माना जाता है
अभिजित मुहूर्त को इतना बलवान माना गया है कि यह अधिकांश दोषों को भी काट देता है, इसीलिए जब कोई और शुभ समय न मिले, तब भी अभिजित मुहूर्त में काम शुरू करना उचित माना जाता है।
एक अपवाद
बुधवार के दिन अभिजित मुहूर्त नहीं माना जाता, क्योंकि यह वार विशेष रूप से इससे बाहर रखा गया है।
नाम के पीछे की कथा
अभिजित नाम एक तारे और नक्षत्र से भी जुड़ा है, प्राचीन ग्रंथों में इसे 28वें नक्षत्र के रूप में भी गिना गया है, हालांकि आमतौर पर प्रचलित सूची में 27 नक्षत्र ही आते हैं। मान्यता है कि भगवान राम का राज्याभिषेक भी अभिजित मुहूर्त में ही हुआ था, यही वजह है कि इसे विशेष विजय और सफलता का प्रतीक माना जाता है।
व्यावहारिक इस्तेमाल
जब किसी शुभ काम के लिए पूरे पंचांग की जांच करने का समय न हो, तब भी अभिजित मुहूर्त में काम शुरू करना एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। दुकान खोलना, नया काम शुरू करना, यात्रा पर निकलना, ऐसे छोटे-मोटे फैसलों के लिए यह सबसे आसानी से याद रखा जाने वाला मुहूर्त है।
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