राहु काल हर दिन का एक तय समयखंड है, जिसे नए शुभ काम शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है।

राहु काल का समय कैसे तय होता है

सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। हर वार (सप्ताह के दिन) के लिए एक तय भाग राहु काल होता है, इसलिए यह हर दिन अलग समय पर पड़ता है।

क्या टालना बेहतर है

नई शुरुआत, जैसे नई नौकरी जॉइन करना, नया व्यापार शुरू करना, यात्रा आरंभ करना या कोई महत्वपूर्ण अनुबंध करना, राहु काल में टाला जाता है।

क्या हर्ज नहीं

पहले से चल रहे काम, रोज़मर्रा के सामान्य काम, या आपातकालीन स्थिति में कोई भी ज़रूरी काम रोकने की सलाह नहीं दी जाती। राहु काल केवल नई शुभ शुरुआत के लिए सावधानी का समय है।

एक आम गलतफहमी

कई लोग सोचते हैं कि राहु काल हर दिन दोपहर में ही पड़ता है, पर ऐसा नहीं है। सोमवार को यह सुबह के करीब आता है, शनिवार को दोपहर बाद, और रविवार को शाम के करीब। हर वार का अपना तय क्रम है, इसलिए बिना जांचे “दोपहर में राहु काल होगा” मान लेना ग़लत हो सकता है, खासकर सर्दियों और गर्मियों में जब सूर्योदय-सूर्यास्त का समय बदलता रहता है।

आज का राहु काल देखें

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