पंचांग शब्द का अर्थ ही है “पाँच अंग”। वैदिक कैलेंडर का हर दिन इन्हीं पाँच तत्वों से पूरा होता है।
पाँचों अंग संक्षेप में
- तिथि: चंद्र दिन, सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोण से बनता है
- वार: सप्ताह का दिन, हर दिन का एक ग्रह स्वामी होता है
- नक्षत्र: चंद्रमा की वर्तमान स्थिति, 27 नक्षत्रों में से एक
- योग: सूर्य और चंद्रमा की देशांश राशियों का योग
- करण: आधी तिथि, हर दिन में दो करण होते हैं
क्यों ज़रूरी है
किसी भी शुभ कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश या नई शुरुआत के लिए, पाँचों अंगों को एक साथ देखा जाता है। कोई एक अंग अकेले पूरी तस्वीर नहीं देता।
पंचांग शब्द की उत्पत्ति
संस्कृत में “पंच” का अर्थ पांच और “अंग” का अर्थ हिस्सा है। प्राचीन समय में पंचांग हाथ से गणना कर छापे जाते थे, हर क्षेत्र का अपना स्थानीय पंचांग होता था क्योंकि गणना अक्षांश-देशांतर पर निर्भर करती है। आज के डिजिटल पंचांग यही गणना खगोलीय सॉफ्टवेयर से सेकंडों में कर देते हैं, पर सिद्धांत वही सैकड़ों साल पुराना है।
विदेश में पंचांग इस्तेमाल करते समय ध्यान रखें
भारत के लिए बना पंचांग सीधे विदेश में इस्तेमाल करना गलत समय दे सकता है, क्योंकि तिथि, नक्षत्र और योग सभी स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करते हैं। न्यूयॉर्क या लंदन का सूर्योदय दिल्ली से घंटों अलग होता है, इसलिए वहां रहने वालों को अपने शहर के लिए अलग से गणना किया गया पंचांग देखना चाहिए, सिर्फ भारत के समय में टाइम-ज़ोन जोड़-घटाव काफी नहीं है।
आज का पंचांग देखें
पंचांग टूल पर अपना शहर चुनें और आज के पाँचों अंग तुरंत देखें, सटीक खगोलीय गणना के साथ।