विवाह से पहले कुंडली मिलान सदियों से परंपरा रही है। इसका उद्देश्य वर और वधू की जन्म-कुंडलियों के आधार पर अनुकूलता का वर्णनात्मक आकलन करना है — कोई “हाँ/ना” का फ़ैसला नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शन।
अष्टकूट — आठ कूट, 36 गुण
गुण मिलान अष्टकूट पद्धति पर आधारित है। आठ कूट और उनके अधिकतम अंक:
- वर्ण (1), वश्य (2), तारा (3), योनि (4)
- ग्रह मैत्री (5), गण (6), भकूट (7), नाड़ी (8)
कुल 36 गुण होते हैं। 18 या अधिक गुण सामान्यतः स्वीकार्य माने जाते हैं।
सटीकता की कुंजी — चंद्रमा और जन्म समय
लगभग पूरा मिलान चंद्रमा की राशि और नक्षत्र पर निर्भर करता है। इसीलिए सटीक जन्म समय ज़रूरी है — हम इसे कभी अनुमान से तय नहीं करते। हमारी गणना Swiss Ephemeris और लाहिरी अयनांश पर आधारित है, जिससे चंद्र नक्षत्र बिल्कुल सही निकलता है।
दोष — केवल अंक पर्याप्त नहीं
ऊँचा अंक होने पर भी नाड़ी दोष या भकूट दोष महत्वपूर्ण होते हैं। साथ ही मांगलिक दोष अलग से देखा जाता है। इसलिए अंक के साथ दोषों को भी पढ़ना चाहिए।
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यह जानकारी पारंपरिक ज्योतिष पर आधारित वर्णनात्मक है; यह विवाह का निर्णय नहीं देती।