मुंडन संस्कार बच्चे के जीवन के सोलह संस्कारों में से एक है। जन्म के बाद बच्चे के पहले बालों को उतारने की यह रस्म परिवार में अक्सर पहली या तीसरी विषम वर्ष की उम्र में की जाती है।

उम्र और साल की परंपरा

पहला, तीसरा या पांचवां साल पूरा होने पर मुंडन करने का चलन है। कुछ परिवार परंपरा या कुल-रीति के अनुसार सातवां साल भी चुनते हैं। सम संख्या वाले साल (दूसरा, चौथा) आमतौर पर टाले जाते हैं।

कौन से महीने और तिथि अनुकूल मानी जाती हैं

चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ और माघ के महीनों को मुंडन के लिए शुभ गिना जाता है। शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी और दशमी तिथियां प्राथमिकता में रहती हैं। सोमवार, बुधवार और गुरुवार को अनुकूल दिन माना जाता है।

रस्म में क्या होता है

आमतौर पर मामा (मां का भाई) या परिवार के किसी बड़े सदस्य को पहला बाल काटने का सम्मान दिया जाता है, इसके बाद नाई पूरा सिर मुंडवाता है। कटे बालों को अक्सर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है या मंदिर में चढ़ाया जाता है। बच्चे को नए कपड़े पहनाए जाते हैं और परिवार में मिठाई बांटी जाती है, यह दिन एक छोटे उत्सव जैसा मनाया जाता है।

अपनी तारीख को दिन के हिसाब से जांचें

महीना और तिथि तय होने के बाद, उसी दिन राहु काल और अभिजित मुहूर्त अलग-अलग समय पर पड़ते हैं। अपने शहर के लिए सही समय जानने के लिए मुहूर्त पेज पर शहर चुनकर उस दिन का राहु काल और अभिजित मुहूर्त देखें, और रस्म राहु काल हटाकर शुभ चौघड़िया में रखें।

अंतिम फैसला परिवार का

अगर बच्चा भारत से दूर रहता हो और भारत यात्रा के साथ मुंडन मिलाना चाहते हों, तो यात्रा की तारीख़ों के आसपास के शुभ दिनों में से चुनना व्यावहारिक तरीका है, ठीक जन्मदिन पर अड़ने की ज़रूरत नहीं।