पंचांग या राशिफल में अक्सर सुना जाता है “बुध वक्री हो गया है” या “शुक्र मार्गी हो गया”। यह शब्द डरावना लगता है, पर असल में यह एक सामान्य खगोलीय घटना का वर्णन है।
वक्री का मतलब क्या है
पृथ्वी से देखने पर, कोई ग्रह कुछ समय के लिए आकाश में पीछे की ओर चलता दिखता है। यह ग्रह का असली उल्टा चलना नहीं, बल्कि पृथ्वी और उस ग्रह की कक्षीय गति के अंतर से बना एक दृष्टि-भ्रम है। जब यह पीछे चलना दिखे, ग्रह वक्री कहलाता है। सामान्य आगे की चाल में लौटने पर वह मार्गी कहलाता है।
कौन से ग्रह वक्री होते हैं
बुध, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि: ये पाँचों साल में एक या दो बार वक्री होते हैं। सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते। राहु और केतु हमेशा वक्री माने जाते हैं, क्योंकि ये चंद्रमा की कक्षा के छाया-बिंदु हैं, वास्तविक पिंड नहीं।
बुध वक्री सबसे ज़्यादा चर्चा में क्यों रहता है
बुध साल में तीन-चार बार वक्री होता है, इसलिए इसका असर सबसे ज़्यादा महसूस होता है। परंपरा में इस दौरान संचार, यात्रा, और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों से जुड़े नए काम शुरू करने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। पहले से चल रहे काम पूरे करना बेहतर माना जाता है।
वक्री का मतलब बुरा समय नहीं
वक्री ग्रह किसी एक तय अशुभ नतीजे की गारंटी नहीं देता। यह पुनर्विचार, समीक्षा और भीतर की ओर देखने का समय माना जाता है, न कि रुक जाने का। कौन सा वक्री ग्रह किस राशि या भाव को छूता है, यह भी असर तय करने में मायने रखता है।
आगामी वक्री तिथियाँ देखें
वक्री कैलेंडर पर बुध, शुक्र, मंगल, गुरु और शनि की आने वाली वक्री और मार्गी तिथियाँ देखें। आज हर ग्रह किस राशि में है, यह गोचर पेज पर मिलेगा।