प्रदोष व्रत हर चंद्र महीने की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, शुक्ल पक्ष में भी और कृष्ण पक्ष में भी। यह भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है और सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में की जाती है।

2026 की प्रदोष व्रत तिथियां

  • 1 जनवरी
  • 16 जनवरी
  • 30 जनवरी
  • 15 फरवरी
  • 1 मार्च
  • 16 मार्च
  • 30 मार्च
  • 15 अप्रैल
  • 29 अप्रैल
  • 14 मई
  • 28 मई
  • 13 जून
  • 27 जून
  • 12 जुलाई
  • 27 जुलाई
  • 10 अगस्त
  • 25 अगस्त
  • 9 सितंबर
  • 24 सितंबर
  • 8 अक्टूबर
  • 24 अक्टूबर

साल के बाकी महीनों की तिथियां पंचांग इंजन में जुड़ते ही अपडेट की जाएंगी। हमेशा अपडेटेड सूची फेस्टिवल कैलेंडर पर उपलब्ध है।

पूजा का सही समय

प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटे पहले शुरू होकर सूर्यास्त के बाद तक रहता है, और यह समय हर शहर में सूर्यास्त के हिसाब से बदलता है। अपने शहर का सूर्यास्त समय मुहूर्त पेज पर देखा जा सकता है।

वार के अनुसार विशेष फल

हर वार का प्रदोष व्रत अलग नाम और फल से जुड़ा है, सोम प्रदोष (सोमवार) को संतान सुख के लिए, भौम प्रदोष (मंगलवार) को कर्ज़ मुक्ति के लिए, और शनि प्रदोष (शनिवार) को शनि दोष शांति के लिए विशेष माना जाता है। इस वजह से कई भक्त अपनी व्यक्तिगत ज़रूरत के हिसाब से साल की किसी खास वार वाली प्रदोष तिथि को प्राथमिकता देते हैं।

अंतिम फैसला आपका

व्रत का पालन सेहत को ध्यान में रखते हुए करें। बीमार व्यक्तियों को उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।