जन्म कुंडली (D1) के अलावा वैदिक ज्योतिष में कई “वर्ग कुंडली” (डिविज़नल चार्ट) बनाई जाती हैं, इनमें नवमांश या D9 सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है।
नवमांश कैसे बनता है
हर राशि (30 डिग्री) को नौ बराबर हिस्सों (नवमांश, हर एक साढ़े तीन डिग्री का) में बांटा जाता है। जन्म के समय हर ग्रह किस नवमांश में है, इसी से D9 कुंडली बनती है।
नवमांश किसके लिए देखी जाती है
- विवाह और जीवनसाथी: नवमांश को परंपरा में विवाह और वैवाहिक जीवन का प्रमुख संकेतक माना जाता है
- ग्रहों की असली ताकत: D1 में कमज़ोर दिख रहा ग्रह अगर नवमांश में मजबूत हो, तो उसे परंपरागत रूप से ज़्यादा भरोसेमंद माना जाता है, इसे “वर्गोत्तम” स्थिति भी कहा जाता है जब ग्रह D1 और D9 दोनों में एक ही राशि में हो
D1 और D9 को साथ में क्यों देखा जाता है
अकेले जन्म कुंडली (D1) पूरी तस्वीर नहीं देती, खासकर विवाह से जुड़े सवालों में। नवमांश को साथ में देखने से किसी ग्रह की सतही स्थिति और असली प्रभाव, दोनों का अंदाज़ा मिलता है।
अन्य वर्ग कुंडलियां
D9 के अलावा भी कई वर्ग कुंडलियां हैं, जैसे D10 (करियर के लिए), D7 (संतान के लिए) और D12 (माता-पिता के लिए), हर एक जीवन के किसी खास पहलू पर बारीक नज़र डालती है। पर इनमें नवमांश सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है क्योंकि विवाह से जुड़े सवाल सबसे आम हैं, और यह ग्रहों की समग्र मज़बूती जांचने का भी एक तरीका है।
अपनी नवमांश देखें
कुंडली टूल पर जन्म विवरण डालकर D1 के साथ D9 नवमांश कुंडली भी देखी जा सकती है।