कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों (कांवड़ियों) की वह वार्षिक पैदल तीर्थयात्रा है, जिसमें वे पवित्र नदियों से गंगाजल भरकर अपने कंधों पर कांवड़ में लेकर चलते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।

2026 की तारीखें

कांवड़ यात्रा 2026 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन अपने चरम पर पहुंचती है, जब अधिकांश कांवड़िए जलाभिषेक करते हैं।

मुख्य मार्ग

  • हरिद्वार: उत्तर भारत, खासकर दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कांवड़ियों का सबसे लोकप्रिय स्रोत।
  • गंगोत्री और गौमुख: लंबी और अधिक कठिन यात्रा चाहने वाले श्रद्धालुओं के लिए।
  • सुल्तानगंज से देवघर (बाबा धाम): बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सबसे प्रसिद्ध मार्ग, लगभग 105 किलोमीटर लंबा।

यात्रा के प्रकार

कांवड़िए अपनी क्षमता के अनुसार सामान्य कांवड़ (रास्ते में रुकते हुए), डाक कांवड़ (बिना रुके, तेज गति से) या खड़ी कांवड़ (कांवड़ को जमीन पर बिना रखे) में से कोई एक तरीका चुनते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • कांवड़ को परंपरा के अनुसार जमीन पर नहीं रखा जाता, इसलिए यात्रा में रुकने के स्टैंड पहले से तय कर लें।
  • यात्रा के मार्गों पर भारी भीड़ और ट्रैफिक डायवर्जन होता है, स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पहले से देख लें।
  • लंबी दूरी की पैदल यात्रा से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखें, खासकर गर्मी और उमस के मौसम में।

पहली बार जाने वालों के लिए

नए कांवड़िए अक्सर दूरी को कम आंक लेते हैं, हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा भी 200 किलोमीटर से ज़्यादा हो सकती है। रास्ते में कई शिविर मुफ़्त भोजन, पानी और आराम की जगह देते हैं, ये स्थानीय सामाजिक संगठनों और मंदिरों द्वारा चलाए जाते हैं। आरामदायक जूते और पैरों की देखभाल की सामग्री साथ रखना अनुभवी कांवड़िए हमेशा सुझाते हैं।

सावन शिवरात्रि का सही समय जानें

अपने शहर के हिसाब से पूजा का सही समय पंचांग पेज पर देखा जा सकता है।