दशहरा (विजयादशमी) 2026, मंगलवार, 20 अक्टूबर को अश्विन शुक्ल दशमी पर है।
यह दिन क्या दर्शाता है
यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो भगवान राम की रावण पर और देवी दुर्गा की महिषासुर पर जीत दोनों को याद करता है। शाम को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। बंगाल में इसी दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन होता है, मैसूर में शाही जुलूस निकलता है।
शस्त्र पूजा और शुभ खरीदारी
इस दिन शस्त्र और औज़ार पूजने की परंपरा है, कारोबारी नई बहीखाता शुरू करते हैं। दशहरा साल के साढ़े तीन सबसे शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है, यानी अलग से पंचांग जांचे बिना भी नई गाड़ी, संपत्ति या व्यापार शुरू करना शुभ माना जाता है।
विजय मुहूर्त का समय
रावण दहन और शस्त्र पूजा परंपरागत रूप से अपराह्न काल, यानी दोपहर के समय में की जाती है, जिसे विजय मुहूर्त कहा जाता है। सटीक मिनट आपके शहर के सूर्यास्त पर निर्भर करता है।
शमी वृक्ष की कथा
रावण दहन के अलावा शमी वृक्ष पूजन की भी परंपरा है, यह पांडवों की कथा से जुड़ी है, अज्ञातवास के दौरान उन्होंने अपने शस्त्र शमी वृक्ष की खोखल में छिपाए थे और विजयादशमी के दिन वापस निकाले थे। इसी वजह से शमी को विजय और साहस का प्रतीक माना जाता है, इसके पत्ते तोड़कर “सोना” कहते हुए परिवार और मित्रों को भेंट करने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।
अपने शहर की टाइमिंग जाँचें
उस दिन के अपराह्न काल और राहु काल के लिए अपना शहर चुनकर मुहूर्त पेज देखें। तिथि की पुष्टि पंचांग पेज पर भी की जा सकती है।