छठ पूजा 2027 में 2 से 5 नवंबर तक मनाई जाएगी। यह चार दिन का पर्व सूर्य देव और छठी मैया की पूजा को समर्पित है।

चार दिनों का कार्यक्रम

  • 2 नवंबर, मंगलवार: नहाय-खाय
  • 3 नवंबर, बुधवार: खरना
  • 4 नवंबर, गुरुवार: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य)
  • 5 नवंबर, शुक्रवार: उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) और पारण

खरना की शाम के बाद व्रती लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, जो उषा अर्घ्य के बाद ही खुलता है।

सूर्योदय-सूर्यास्त का सटीक समय

संध्या और उषा अर्घ्य के लिए ठीक सूर्योदय-सूर्यास्त समय शहर के अनुसार बदलता है। पंचांग पेज पर अपना शहर चुनकर 4 नवंबर के सूर्यास्त और 5 नवंबर के सूर्योदय की पुष्टि करें।

चार दिनों की तैयारी

नहाय-खाय के दिन व्रती स्नान कर कद्दू-भात और चने की दाल का सात्विक भोजन करती हैं, यह पूरे व्रत की शुद्धता की शुरुआत मानी जाती है। खरना के दिन शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर खाया जाता है, इसके बाद ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है। घाट पर बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल और गन्ना सजाकर अर्घ्य दिया जाता है, यह पर्व मुख्यतः बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है पर अब देश-विदेश के हर बड़े शहर में जहां भी बिहारी समुदाय है, वहां घाट या तालाब किनारे यह आयोजन होता है।

अंतिम फैसला परिवार का

व्रत का पालन सेहत को ध्यान में रखते हुए करें। लंबे निर्जला व्रत से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है, खासकर गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों के लिए।