बुद्ध पूर्णिमा 2027 में 20 मई, गुरुवार को है, वैशाख पूर्णिमा के दिन।

पर्व का महत्व

इस एक ही तिथि पर भगवान बुद्ध के जन्म लुंबिनी में, बोधगया में ज्ञान प्राप्ति, और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण, तीनों घटनाओं का स्मरण किया जाता है। तीनों घटनाएं वैशाख पूर्णिमा को ही हुई थीं। हिंदू परंपरा में बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार भी माना जाता है, वहीं बौद्ध परंपरा उन्हें स्वतंत्र गुरु मानती है।

दिन कैसे मनाया जाता है

बौद्ध विहारों में सुबह से भीड़ जुटती है, बुद्ध प्रतिमा का दूध और सुगंधित जल से अभिषेक किया जाता है। लोग सफेद कपड़े पहनते हैं, बोधि वृक्ष के नीचे दीप जलाते हैं, और दिन भर मांस-मदिरा से दूर रहते हैं। कई परिवार इस दिन दान करते हैं, भोजन-वस्त्र बांटते हैं, क्योंकि करुणा बौद्ध शिक्षाओं की नींव है।

पूजन का सामान्य समय

पूजा और ध्यान सुबह के समय पूर्णिमा तिथि रहते हुए किया जाता है। कई लोग सूर्योदय से पहले उठकर मौन ध्यान करना पसंद करते हैं, क्योंकि माना जाता है बुद्ध को ज्ञान-प्राप्ति भी इसी समय हुई थी।

अपने शहर के लिए समय जांचें

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